कोरबा : सोमवार को एसईसीएल मानिकपुर क्षेत्र के खदान विस्तार से प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने रोजगार और पुनर्वास की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। एसईसीएल मानिकपुर प्रभावित ग्राम भू-विस्थापित समिति ने 20 जुलाई को महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा है। समिति ने चेतावनी दी है कि मांगें न मानी जाने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी। इस समिति में मिलाई खुर्द, रापाघर्रा, कुदारी खार, दादर खुर्द सहित 10 गांवों के ग्रामीण शामिल हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मानिकपुर खदान विस्तार के समय उनकी भूमि अधिग्रहीत की गई। यह उपजाऊ और सिंचाई युक्त भूमि नाला डायवर्सन के नाम पर ली गई थी। अब उनके मकान और खेती योग्य जमीन भी पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। रोजगार के नाम पर उन्हें सिर्फ आश्वासन मिले हैं। जमीन जाने के बाद ग्रामीणों के पास जीविका का कोई साधन नहीं बचा है। वर्षों से दिए जा रहे आश्वासन जमीनी स्तर पर पूरे नहीं हुए हैं।
ग्रामीणों ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। सभी निजी ठेका कंपनियों में प्रभावित गांवों के मूल निवासियों को रोजगार में प्राथमिकता मिले। योग्यतानुसार जमा आवेदन पत्रों का शीघ्र निराकरण किया जाए। OSL जैसी निजी कंपनियों को दलाली या पैसों की मांग न करने का निर्देश दिया जाए। पहले कलिंगा कंपनी के समय हुए छलावे को दोहराया न जाए।
भर्ती प्रक्रिया में भू-विस्थापित समिति का हस्ताक्षर अनिवार्य किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। छत्तीसगढ़ में SECL की खदानों में 90 फीसदी स्थानीय भू-विस्थापितों को रोजगार में आरक्षण मिले। ग्रामीणों ने कहा कि दादर खुर्द के करीब 100 किसानों की जमीन पौधारोपण के बदले रोजगार के वादे पर ली गई थी, लेकिन वह पूरा नहीं हुआ। समिति ने 15 दिनों में ठोस निर्णय न होने पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है। ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर कोरबा, अनुविभागीय अधिकारी कोरबा और मुख्य महाप्रबंधक कोरबा को भी भेजी गई है।


