सक्ती – जिले के पतेरापाली समिति में एक बार फिर फर्जीवाड़ा को बढ़ावा देने की दुर्गंध आ रही है। भ्रष्टाचार में लिफ्ट पूर्व संस्था प्रबंधक महेत्तर साहू को समिति में लेने की योजना बनाई जा रही है जबकि महेत्तर साहू के ऊपर फर्जी केसीसी एवं भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे हुए थे जिसका दस्तावेजी प्रमाण भी मिला था जिसके बाद बर्खास्तगी की कार्यवाही भी हुई थी।
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हालांकि महेत्तर साहू द्वारा इस कार्यवाही को लेकर संबंधित न्यायालय की शरण में जाते हुए एक बार फिर वापसी करने आदेश ले आया हैं जिसका समिति के वर्तमान संस्था प्रबंधक रमन साहू एवं प्राधिकृत अध्यक्ष भुवनेश्वर साहू दोनों ने ही इसका विरोध नहीं किया बल्कि भ्रष्टाचारी को आप मौन स्वीकृति देते हुए बचा लिए। अब जल्द ही इस समिति में वापस लाना चाह रहे हैं।
आपको बता दे महेत्तर साहू के कार्यकाल में फर्जी केसीसी की बाढ़ आ गई थी जिसमें स्वयं की पत्नी के नाम से भी फर्जी केसीसी लोन निकाल लिया था। इसके अलावा वर्ष 2018 – 19 में भी फर्जी केसीसी बांट कर लाखों रुपए का फर्जीवाड़ा किया था।
इतना ही नहीं महेत्तर साहू द्वारा अपने कार्यकाल में कालातीत लोन में समिति को मिलने वाले ब्याज का भी गणना नहीं किया गया जबकि बैंक के द्वारा हर वर्ष ब्याज लिया जा रहा है। इस तरह ब्याज का गणना नहीं करने से भी समिति को अब तक लाखों रुपए का नुकसान हो चुका है।
पूर्व में वर्ष 2022 – 23 में दवाई वितरण कर लगभग 3 लाख रूपये कमीशन की राशि तक जमा नहीं कर घोटाला किया है जिसकी शिकायत भी हुई है। इस पूरे मामले वर्तमान संस्था प्रबंधन और प्राधिकृत अध्यक्ष का खुला संरक्षण है। अगर हाल यही रहा तो वह समय दूर नहीं की समिति पूरी तरह से कर्ज में डूब जाएगी।
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यदि महेत्तर साहू की वापसी होती है तो एक बार फिर उच्च स्तरीय शिकायत कर कार्यवाही करने की मांग की जाएगी जिसमें सहयोग करने वालों को भी शामिल किया जाएगा।
पहला सवाल – महेत्तर साहू के द्वारा अपने नाम पर वर्ष 2018 – 19 से लेकर वर्ष 2025 – 26 तक कब – कब और कितना केसीसी लोन लिया गया था? रकबा की जांच किया जाए? और क्या लिए गए केसीसी लोन की राशि का भुगतान समय सीमा में किया गया था? यदि नहीं तो फिर क्या लोन की राशि के साथ ब्याज की राशि महेत्तर साहू द्वारा जमा किया गया? यदि नहीं तो फिर क्यों जमा नहीं किया गया? और इसके लिए क्या समिती एवं बैंक दोनों के कर्मचारी जिम्मेदार हैं? जांच होनी चाहिए।
दूसरा सवाल – महेत्तर साहू पतेरापाली समिति में पूर्व संस्था प्रबंधक रहते हुए वर्ष 2022 – 23 में दवाई वितरण कर कमीशन की राशि लगभग 3 लाख रुपए का समायोजन आज दिनांक तक नहीं किया है जिसकी लिखित शिकायत भी हुई है फिर भी इस मामले की जांच नहीं किया जा रहा है और ना ही इसके लिए वर्तमान संस्था प्रबंधक एवं प्राधिकृत अध्यक्ष, सहकारिता विस्तार अधिकारी द्वारा वसूली करने कोई कार्यवाही की जा रही है जबकि उक्त राशि समिति में जमा होना था, यह भी बड़ा सवाल हज जिसकी जांच होने पर फर्जीवाड़ा करने और संरक्षण देने वाले बेनकाब हो जाएंगे।
तीसरा सवाल – पतेरापाली समिति में महेत्तर साहू द्वारा पूर्व प्रभारी संस्था प्रबंधक रहते हुए कालातीत किसानों को भी केसीसी लोन दिया गया था जबकि कालातीत किसानों को लोन देने का कोई प्रावधान नहीं है फिर भी इस मामले में आज दिनांक तक जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई और आज उसी फर्जी कर्मचारी को वापस लेने कार्यवाही करने की तैयारी की जा रही है। बड़ा सवाल है, इसकी जांच होनी चाहिए।
चौथा सवाल – पतेरापाली समिति के पूर्व संस्था प्रबंधक महेत्तर साहू के कार्यकाल में कालातीत किसानों को लोन देकर बेजा लाभ दिया गया लेकिन संबंधित ऑडिटर के द्वारा भी इस भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए आपत्ति दर्ज करने के बजाय मुहर लगाते हुए क्लीन चिट दिया गया है जो की जांच के विषय है, इसकी भी जांच की जाए और साथ ही जो भी इस मामले में संलिप्त है उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।


