चेन्नई: तमिलनाडु में हिंदी भाषा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सरकार राज्य में हिंदी भाषा के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाला बिल विधानसभा में बुधवार को पेश कर सकती है।प्रस्तावित बिल में पूरे राज्य में हिंदी फिल्मों, गानों, विज्ञापन बोर्डों और होर्डिंग्स पर बैन लगाने की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य स्थानीय भाषा तमिल को बढ़ावा देना और “भाषाई एकरूपता” को बनाए रखना है।
कोरबा में हाथियों का आतंक: करतला वनपरिक्षेत्र में 52 हाथियों का झुंड, दो दर्जन किसानों की फसल बर्बाद
सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार चाहती है कि राज्य में सभी सार्वजनिक बोर्ड, साइनबोर्ड और विज्ञापन केवल तमिल भाषा में हों। इससे पहले भी राज्य सरकार ने कई सरकारी दस्तावेजों और घोषणाओं में हिंदी के स्थान पर तमिल के इस्तेमाल पर जोर दिया था।
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही स्टालिन सरकार ने राज्य बजट में रुपए के प्रतीक (₹) को तमिल सिंबल से बदलने का प्रस्ताव रखा था। अब हिंदी पर संभावित बैन को लेकर केंद्र और राज्य के बीच नई बहस शुरू हो सकती है।फिलहाल विपक्षी दलों ने इसे “भाषाई असहिष्णुता” करार दिया है, जबकि DMK समर्थकों का कहना है कि यह कदम तमिल संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए जरूरी है।


